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श्री साईं मंत्र

By पारंपरिक (साईं भक्त परंपरा)२०वीं शताब्दीसंस्कृत-हिन्दी-मराठी

6 min readLast reviewed May 2, 2026

प्रमुख साईं मंत्र

१. मूल मंत्र — सर्वाधिक प्रचलित

ॐ साईं राम।

यह सबसे सरल और सर्वाधिक प्रचलित साईं मंत्र है। साईं भक्त इसे हजारों-लाखों बार दोहराते हैं। एक मनके पर एक ‘ॐ साईं राम’ — १०८ की एक माला।

२. प्रणाम मंत्र (पंचाक्षर)

ॐ साईंनाथाय नमः।

पंचाक्षर मंत्र। पारंपरिक संस्कृत-शैली में रचा। पूजा के आरंभ में स्मरण।

३. सद्गुरु मंत्र (षडक्षर)

ॐ सद्गुरु साईंनाथाय नमः।

साईं को ‘सद्गुरु’ (सच्चे गुरु) के रूप में स्मरण। यह अधिक भावपूर्ण मंत्र है — बाबा को मात्र देवता नहीं, बल्कि जीवन-गुरु के रूप में स्थापित करता है।

४. महामंत्र (अष्टाक्षर)

ॐ श्री साईं राम जय जय साईं राम।

संगीतमय कीर्तन के लिए विशेष उपयुक्त। ‘जय जय’ की पुनरावृत्ति आनन्दमय भक्ति का संचार करती है।

५. साईं गायत्री

ॐ शिरडी वासाय विद्महे, सच्चिदानन्दाय धीमहि।
तन्नो साईं प्रचोदयात्॥

गायत्री मंत्र की तर्ज पर बना साईं-गायत्री। प्रात:-संध्या-सायं तीनों संधियों पर पाठ्य।

अर्थ — “हम शिरडी में निवास करने वाले उन साईं को जानते हैं; सच्चिदानन्द-स्वरूप का ध्यान करते हैं; वे साईं हमें (सत्-मार्ग पर) प्रेरित करें।”

६. बाबा का स्वयं का वचन — ‘अल्लाह मालिक’

अल्लाह मालिक। अल्लाह मालिक। अल्लाह मालिक।

बाबा स्वयं इसी का जप करते थे। अर्थ — ‘अल्लाह (ईश्वर) ही मालिक है।’ साईं की सर्व-धर्म-समभाव का सबसे संक्षिप्त रूप।

७. बाबा का अंतिम वचन

‘मैं तुम्हारे साथ हूँ, सदा तुम्हारे साथ।’

जप-मंत्र नहीं, परंतु बाबा का सर्वोच्च आश्वासन। संकट के समय इसी का स्मरण।

मंत्र-अर्थ विस्तार

‘ॐ साईं राम’ — क्यों इतना प्रचलित?

यह मंत्र तीन शक्तियों का संगम है:

  • ‘ॐ’ — सम्पूर्ण ब्रह्म का बीज-नाद
  • ‘साईं’ — गुरु, ईश्वर, सहायक (फारसी), भगवान् (मराठी)
  • ‘राम’ — सत् (होने का सत्य), हिन्दू-धर्म का सर्व-समावेशी नाम

बाबा स्वयं मस्जिद में रहते हुए ‘राम राम’ सुनते थे। उन्होंने ‘अल्लाह’ और ‘राम’ दोनों को एक माना। ‘ॐ साईं राम’ इसी एकत्व का सूत्र है।

सद्गुरु-मंत्र की विशेषता

‘सद्गुरु’ = सच्चा गुरु। साईं भक्ति में बाबा मात्र देवता नहीं — वे ‘जीवन के सद्गुरु’ हैं। यह मंत्र मानता है कि बाबा का संबंध शिष्य-गुरु का है — बाबा हर भक्त को व्यक्तिगत रूप से मार्ग दिखाते हैं।

साईं गायत्री का महत्व

पारंपरिक गायत्री मंत्र सूर्य-देव का है। साईं-गायत्री उसी छंद-संरचना में बाबा को आहूत करती है — ‘विद्महे’ (हम जानते हैं), ‘धीमहि’ (ध्यान करते हैं), ‘प्रचोदयात्’ (प्रेरित करें)। यह बाबा को वैदिक-स्तर का देवत्व प्रदान करती है, जो साईं-भक्ति परंपरा के विकास का संकेत है।

जप विधि

कब करें

  • दैनिक प्रातः ब्रह्म-मुहूर्त (४:०० — ६:०० बजे) — सर्वोच्च समय
  • गुरुवार — विशेष फलदायी
  • साईं नवरात्रि के नौ दिनों में
  • यात्रा-पूर्व अथवा कठिन कार्य से पूर्व
  • रात्रि सोने से पूर्व — मन की शान्ति के लिए
  • संकट काल में — बीच-बीच में मानसिक जप

कैसे करें

  1. एकाग्र मन से बैठें। आसन शुद्ध; मुख पूर्व अथवा उत्तर की ओर।
  2. साईं बाबा का चित्र अथवा पादुका सम्मुख रखें।
  3. तेल का दीप प्रज्वलन।
  4. रुद्राक्ष अथवा तुलसी की माला हाथ में लें।
  5. एक मनके पर एक ‘ॐ साईं राम’ — दाहिने हाथ के अंगूठे एवं मध्यमा से।
  6. एक माला (१०८) = एक चक्र।
  7. प्रतिदिन एक से सात मालाओं का संकल्प।
  8. जप के पश्चात एक से पाँच मिनट का मौन ध्यान — बाबा की उपस्थिति का अनुभव।
  9. अंत में ‘जय साईं राम’ का तीन बार उच्चारण।

विशेष विधियाँ

सरल विधि (दैनिक) — एक माला ‘ॐ साईं राम’। १०८ बार।

मध्यम विधि (साप्ताहिक) — गुरुवार को १००८ बार ‘ॐ साईं राम’।

दीर्घ विधि (अनुष्ठान) — ४१ दिनों तक प्रतिदिन ११ मालाएँ (११८८ बार)।

पुरश्चरण विधि — १,२५,००० बार ‘ॐ साईं राम’ — एक पूर्ण पुरश्चरण। यह कई महीनों का संकल्प है।

मन ही मन जप

पारंपरिक रूप से तीन प्रकार के जप हैं:

  1. वाचिक (बोलकर) — आरंभिक स्तर
  2. उपांशु (होंठ हिलाकर, बिना ध्वनि) — मध्यम स्तर
  3. मानसिक (मन ही मन) — सर्वोच्च स्तर

बाबा कहते — “जो मेरा मन ही मन स्मरण करता है, मैं उसके पास हूँ।” मानसिक जप कभी भी, कहीं भी संभव है — काम करते-करते, यात्रा में, रात-दिन।

फलश्रुति

‘ॐ साईं राम’ के नित्य जप के फल

साईं भक्तों की परंपरा में निम्न फल बताए गए हैं:

  • मानसिक शांति — चिंता-तनाव से मुक्ति
  • संकट निवारण — जीवन की कठिनाइयों का सहज समाधान
  • रोग-मुक्ति — शारीरिक एवं मानसिक दोनों
  • धन-वृद्धि — बाबा ‘दीन-धन-दाता’ हैं
  • गुरु-कृपा का अनुभव — बाबा की उपस्थिति का बोध
  • अंतकाल में राम-स्मरण — मोक्ष-सूत्र

शास्त्रीय फलश्रुति

साईं सच्चरित्र के अनेक अध्यायों में स्पष्ट कथन हैं:

“जो मेरा नाम लेता है, मैं उसके साथ हूँ — सदैव। श्रद्धा से मेरा नाम जपो; तुम्हारे सब काम मैं करूँगा।”

“मेरा नाम सबसे महान् मंत्र है। नाम से बढ़कर कोई औषधि नहीं।”

महत्व

  • सरलतम साधना — संस्कृत-ज्ञान, मंदिर, पुजारी — किसी की आवश्यकता नहीं।
  • २४ घंटे संभव — मानसिक जप कभी भी, कहीं भी।
  • सर्व-धर्म-समभाव का प्रतीक — ‘अल्लाह मालिक’ से ‘ॐ साईं राम’ — सब एक ही मार्ग।
  • गुरु-शिष्य संबंध का प्रतिष्ठा — साईं को मात्र देवता नहीं, सद्गुरु के रूप में स्थापन।
  • अंतकाल का सहारा — गीता का ‘अन्ते मतिः सा गतिः’ का साकार रूप।

सामान्य प्रश्न

कौन सा साईं मंत्र सबसे श्रेष्ठ है?

‘ॐ साईं राम’ सबसे प्रचलित है — सरल, सशक्त, सार्वभौम। ‘सद्गुरु साईंनाथाय नमः’ भी विशेष फलदायी। चुनाव अपनी रुचि एवं श्रद्धा पर निर्भर — बाबा सब रूपों में स्वीकार करते हैं।

क्या मंत्र-दीक्षा आवश्यक है?

पारंपरिक तंत्र-शास्त्र में गुरु-दीक्षा अनिवार्य मानी गई है। परंतु साईं भक्ति में ‘श्रद्धा’ ही सर्वोपरि है। बाबा की दृष्टि में जो श्रद्धा से नाम लेता है, वह स्वयं दीक्षित है। यदि उपलब्ध हो तो किसी साईं-गुरु से दीक्षा लाभदायक, परंतु अनिवार्य नहीं।

कौन सी माला सर्वोत्तम?

रुद्राक्ष माला (शिव-स्वरूप, साईं को दत्तात्रेय अवतार माना गया — शिव अंश), तुलसी माला (विष्णु-स्वरूप), अथवा साधारण कमंडल माला भी पर्याप्त। १०८ मनकों की माला मानक है।

क्या स्त्रियाँ रजस्वला अवस्था में जप कर सकती हैं?

बाबा की दृष्टि में श्रद्धा सर्वोपरि। मानसिक जप सदैव अनुमत है। माला से जप करने में परंपरागत संकोच है, परंतु बाबा स्वयं इन प्रतिबंधों से ऊपर थे — अंतिम निर्णय स्वयं की श्रद्धा पर।

‘अल्लाह मालिक’ कह सकते हैं?

बिल्कुल। बाबा स्वयं इसी का जप करते थे। यह उनकी सर्व-धर्म-दृष्टि का सबसे शुद्ध रूप है। यदि घर का वातावरण न हो तो मन ही मन कह सकते हैं।

मंत्र की संख्या क्या मायने रखती है?

संख्या से अधिक गुणवत्ता महत्वपूर्ण। १०८ बार सावधानी एवं श्रद्धा से, १००० बार यांत्रिक रूप से अधिक श्रेष्ठ। परंतु संख्या-संकल्प से अनुशासन बनता है — दोनों का संतुलन आदर्श।

क्या एक से अधिक मंत्रों का जप कर सकते हैं?

हाँ। एक दिन में ‘ॐ साईं राम’ की एक माला, साईं गायत्री की पाँच आवृत्तियाँ, और ‘सद्गुरु साईंनाथाय नमः’ की तीन आवृत्तियाँ — सब किया जा सकता है। केवल एक मुख्य मंत्र चुनना आदर्श, परंतु अन्य मंत्र भी पाठ्य।

बच्चों को कौन सा मंत्र सिखाएँ?

‘ॐ साईं राम’ — सबसे सरल। बच्चे ३-४ वर्ष की आयु में भी यह मंत्र सीख जाते हैं। प्रतिदिन सोने से पहले ११ बार दोहराने का संकल्प कराएँ — जीवन-भर का संस्कार।