श्री राम चालीसा
By पारंपरिक (अज्ञात रचयिता)१९वीं–२०वीं शताब्दीखड़ी बोली–अवधी मिश्रित
मूल पाठ
दोहा
श्री रघुवीर भक्त हितकारी।
सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
निशिदिन ध्यान धरै जो कोई।
ता सम भक्त और नहिं कोई॥
चौपाई
श्री रघुवीर दया के सागर।
गुणधाम राम नाम उजागर॥१॥
रामचन्द्र दशरथ के नंदन।
भू-पीड़ा हरने को बंधन॥२॥
जय कौशल्या के सुत प्यारे।
सिया-राम जय जानकि-कान्ता॥३॥
रघुकुल-मणि अवध-बिहारी।
पतित-पावन सरयू-सहारी॥४॥
विश्वामित्र के यज्ञ बचाए।
ताड़का-राक्षसि मार उड़ाए॥५॥
अहिल्या उद्धार जनक नगर।
शिव-धनुष तोड़ा वहाँ अमर॥६॥
जानकि से किया विवाह तुरंता।
राजा-रानी हर्षित अनंता॥७॥
पिता-वचन रख वन को सिधाए।
सीता-लखन सहित कूच फिराए॥८॥
चित्रकूट में किया निवासा।
भरत मिले दे राज-निवासा॥९॥
खर-दूषण सम राक्षस मारे।
पंचवटी में दिन गुजारे॥१०॥
स्वर्ण-मृग का रूप दिखाया।
मारीच ने सिय-हरण कराया॥११॥
रावण ले आया लंका भारी।
सीता-दुख से व्याकुल भारी॥१२॥
जटायु रण कर वीर-गति पाया।
राम-नाम हृदय बसाया॥१३॥
सुग्रीव से करि मित्रता निकट।
बालि वध से अधर्म कर गिरफ्त॥१४॥
हनुमान को दूत बनाया।
लंका जा सिय-दर्शन कराया॥१५॥
अंगूठी सीता को पहुँचाई।
लंका दहन की लीला रचाई॥१६॥
सेतु बंधा वानर-दल लेकर।
लंका पर कर दीन्ह नियंत्रण॥१७॥
मेघनाद को लखन निपाते।
कुंभकर्ण को राम संहारे॥१८॥
रावण से युद्ध भयंकर कीन्हा।
दश-शिर वंशी का दहन कीन्हा॥१९॥
विभीषण को लंका-राज दिला।
सीता-संग पुष्पक उड़ चला॥२०॥
अयोध्या में हुआ अभिषेकम्।
राम-राज्य का छाया मेकम्॥२१॥
राम-राज्य में प्रजा सुखारी।
न रोग, न शोक, न दुख-व्यथारी॥२२॥
धर्म-स्थापना भू पर कीनी।
मर्यादा की मूर्ति चीनी॥२३॥
राम नाम सब पाप विनाशे।
नर्क का भय सब दूर निकाले॥२४॥
राम कथा कथिये जो कोई।
ता सम भक्त और नहिं कोई॥२५॥
राम-नाम जप एक सहारा।
तुलसी ने भी इसे उच्चारा॥२६॥
राम तेरे चरणों में रहूँ।
तेरी कृपा से हर बात कहूँ॥२७॥
प्रभु जी! दीनबन्धु तुम जाने।
हम तो दीन हैं तुम्हें माने॥२८॥
संकट से तुम भक्त बचाए।
केवट को भी पार लगाए॥२९॥
शबरी के भोजन को खाए।
प्रेम-भक्ति को सर्वोत्तम बताए॥३०॥
विभीषण-संग सुग्रीव-संग।
हनुमंत-संग सब के संग॥३१॥
जो जन शरण आयो तेरी।
तेरी कृपा सदा अति केरी॥३२॥
मंगलवार जो ध्यान करै कोई।
राम कृपा से बल बुद्धि होई॥३३॥
राम नवमी का व्रत सुहाए।
चालीसा जो नित जप जाए॥३४॥
संकट-मोचन हनुमत प्यारा।
तेरे चरण-कमल का सहारा॥३५॥
राम-नाम लिख जिसने पाया।
वही नर मुक्ति को प्राप्त हो जाया॥३६॥
तुलसी का मानस ग्रंथ बनाया।
राम-कथा अमर बना डाला॥३७॥
अंत समय जो राम पुकारे।
स्वर्ग-मोक्ष दोऊ ले डारे॥३८॥
जो यह चालीसा नित गावै।
सर्व-कष्ट से मुक्ति पावै॥३९॥
मंगलवार रामदास सुनावै।
मनोकामना सिद्धि पावै॥४०॥
दोहा
राम राम सब जग कहै, राम न जाने कोय।
जो जन जाने राम को, राम बिनु कुछ नहिं होय॥
अर्थ
राम चालीसा में मर्यादा-पुरुषोत्तम भगवान् श्री राम के सम्पूर्ण जीवन-चरित्र का संक्षिप्त एवं भक्ति-पूर्ण वर्णन है — बाल्यकाल से लेकर अयोध्या-राज्याभिषेक और राम-राज्य-स्थापना तक।
दोहा — श्री रघुवीर भक्तों के हितकारी हैं; प्रभु, हमारी अरज (विनती) सुनिए। दिन-रात जो ध्यान करता है, उससे बड़ा कोई भक्त नहीं।
चौपाई १-४ — राम का परिचय: रघुवीर, दया के सागर, गुण-धाम; दशरथ-कौशल्या के पुत्र; जानकी-पति; रघुकुल-मणि; अवध-बिहारी।
चौपाई ५-७ — बाल-काण्ड: विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा, ताड़का-वध, अहल्या-उद्धार, धनुष-यज्ञ में शिव-धनुष तोड़कर सीता से विवाह।
चौपाई ८-१० — अयोध्या-काण्ड एवं अरण्य-काण्ड: पिता-वचन हेतु वन-गमन, चित्रकूट में निवास, भरत-मिलन, खर-दूषण-वध, पंचवटी-निवास।
चौपाई ११-१४ — सीता-हरण से किष्किन्धा-काण्ड: स्वर्ण-मृग, मारीच, रावण द्वारा सीता-हरण, जटायु-वध, सुग्रीव-मैत्री, बालि-वध।
चौपाई १५-१७ — सुन्दर-काण्ड: हनुमान को दूत, लंका-यात्रा, सीता-दर्शन, अंगूठी-समर्पण, लंका-दहन, सेतु-बंध।
चौपाई १८-२० — युद्ध-काण्ड: मेघनाद-वध (लखन द्वारा), कुम्भकर्ण-वध, रावण-वध, विभीषण-राज्याभिषेक।
चौपाई २१-२३ — उत्तर-काण्ड का संक्षेप: अयोध्या-वापसी, राज्याभिषेक, राम-राज्य की स्थापना, धर्म-मर्यादा का साकार रूप।
चौपाई २४-३२ — राम-नाम की महिमा एवं भक्तों की गाथा — केवट, शबरी, सुग्रीव, विभीषण, हनुमान — सब के साथ राम का संबंध।
चौपाई ३३-३८ — पूजा-विधि के संकेत: मंगलवार का ध्यान, राम नवमी का व्रत, अंतकाल में राम-स्मरण।
चौपाई ३९-४० — फलश्रुति: नित्य पाठ से सर्व-कष्ट से मुक्ति; मंगलवार पाठ से मनोकामना-सिद्धि।
इतिहास
राम चालीसा की रचना १९वीं-२०वीं शताब्दी की है, हनुमान चालीसा की लोकप्रियता के पश्चात् अनेक देवी-देवताओं के लिए चालीसा-रचना की परंपरा का अंग। रचयिता संभवतः रामदास (अंतिम चौपाई में नाम-संकेत), परंतु सटीक प्रमाण उपलब्ध नहीं।
शास्त्रीय आधार — राम-कथा का सर्वोच्च स्रोत वाल्मीकि रामायण (२४००० श्लोक) है। तुलसीदास का रामचरितमानस (१६वीं शताब्दी) ने राम को घर-घर तक पहुँचाया। चालीसा इन्हीं ग्रंथों का संक्षेपण है।
अवतार-कथा — पुराण-काल में राम को विष्णु का सातवाँ अवतार माना गया। ‘मर्यादा-पुरुषोत्तम’ — मानवीय आदर्श की सर्वोच्च मूर्ति। राम-राज्य भारतीय सांस्कृतिक चेतना में ‘आदर्श शासन’ का प्रतिमान है।
आधुनिक प्रचलन — आज:
- राम नवमी (चैत्र शुक्ल नवमी) राम का जन्म-दिवस
- विजयादशमी (दशहरा) रावण-वध का स्मरण
- दिवाली राम-अयोध्या-वापसी का उत्सव
- मंगलवार हनुमान के साथ राम-स्मरण का प्रिय वार
— इन सब अवसरों पर राम चालीसा का पाठ अनिवार्य अंग है।
पाठ विधि
कब करें
- दैनिक प्रातः स्नान के पश्चात
- मंगलवार एवं शनिवार — विशेष फलदायी
- राम नवमी — चैत्र शुक्ल नवमी पर पूरे दिन
- विजयादशमी, दिवाली — विशेष पर्व
- संकट काल में — अकाल मृत्यु, रोग, ऋण, मानसिक तनाव
कैसे करें
- स्नान के पश्चात पीले अथवा श्वेत वस्त्र धारण करें।
- पूजा-स्थल पर श्री राम, सीता, लक्ष्मण, और हनुमान का चित्र/प्रतिमा।
- तुलसी पत्र, पुष्प (विशेषकर कमल), चंदन, धूप-दीप अर्पित करें।
- गाय का घी का दीपक सर्वोत्तम।
- पंचमेवा-प्रसाद, खीर, अथवा हलवा का भोग।
- गणेश-स्मरण के पश्चात राम मंत्र: ‘श्री राम जय राम जय जय राम’ का ११ बार जप।
- चालीसा का स्पष्ट उच्चारण से पाठ — एक बार दैनिक, ११ बार राम नवमी पर।
- अंत में ‘श्री रामचन्द्र कृपालु भजमन्’ अथवा ‘आरती कीजै हनुमान लला की’ गाएँ।
- हनुमान चालीसा का पाठ राम चालीसा के पश्चात् अधिक फलदायी।
राम नवमी विशेष
- सूर्योदय से पूर्व स्नान
- दिन भर ‘राम-नाम जप’ — माला अथवा मन में
- दोपहर १२:०० बजे राम-जन्म का उत्सव — आरती, घंटा, शंख
- शाम को राम-कथा अथवा रामचरितमानस-पाठ
- ९ ब्राह्मणों अथवा कन्याओं को भोजन
महत्व
- पूरी राम-कथा का संक्षेप — एक चालीसा में सम्पूर्ण रामायण।
- मर्यादा-शिक्षा — राम के माध्यम से धर्म-मर्यादा का बोध।
- हनुमान के साथ — मंगलवार को राम-हनुमान दोनों का स्मरण विशेष फलदायी।
- राम-राज्य की प्रेरणा — आदर्श शासन की कल्पना का साकार रूप।
- अंतकाल का संरक्षक — गीता एवं भागवत दोनों में ‘राम’ को अंतिम स्मरण-नाम बताया गया है।
सामान्य प्रश्न
क्या राम चालीसा और रामचरितमानस एक हैं?
बिल्कुल नहीं। रामचरितमानस तुलसीदास का महाकाव्य है — सात काण्डों में लगभग १३,००० चौपाई-दोहों का विशाल ग्रंथ। राम चालीसा १९-२०वीं शताब्दी की संक्षिप्त ४०-चौपाइयों वाली रचना है।
मंगलवार को राम चालीसा क्यों?
मंगलवार हनुमान का प्रिय दिन है, और हनुमान राम के परम भक्त हैं। मंगलवार को राम-स्मरण से हनुमान भी प्रसन्न होते हैं — और हनुमान का प्रसन्न होना राम की निकटता का सरलतम मार्ग है। इसी कारण मंगलवार को राम और हनुमान दोनों का पाठ साथ-साथ होता है।
क्या रजस्वला अवस्था में पाठ कर सकती हैं?
मानसिक पाठ सदैव अनुमत है। शास्त्रीय परंपरा में सस्वर पाठ एवं स्पर्श-पूजा का परिहार है, परंतु आधुनिक अधिकांश आचार्य मानसिक स्मरण को निर्विवाद मानते हैं।
राम मंत्र कौन सा सबसे प्रसिद्ध है?
‘श्री राम जय राम जय जय राम’ — यह सर्वाधिक प्रसिद्ध राम-मंत्र है। ‘राम राम राम’ — सरलतम। ‘ॐ श्री रामाय नमः’ — पारंपरिक छह-अक्षरीय मंत्र। ‘जय श्री राम’ — आधुनिक प्रचलन में।
क्या राम-नाम केवल हिन्दुओं के लिए है?
बिलकुल नहीं। राम-नाम का जप कबीर, गुरु नानक, मीराबाई, रहीम — सब ने किया। यह सर्व-धर्म-सम्मत नाम है। महात्मा गाँधी का अंतिम शब्द भी ‘हे राम’ था। राम ‘जो सब में रमण करते हैं’ — सर्व-व्यापी हैं।
क्या राम चालीसा अंतकाल में पढ़ी जा सकती है?
बिल्कुल। राम-नाम अंतकाल का सर्वोत्तम स्मरण है। चालीसा का पाठ संभव न हो तो केवल ‘श्री राम’ का जप पर्याप्त है। ‘अंते मतिः सा गतिः’ — अंत में जिसका स्मरण, उसी की गति।
मंगलवार को क्या भोग चढ़ाएँ?
बूँदी, गुड़, चना, मेवे, मिष्ठान्न — सब उत्तम। तुलसी पत्र अनिवार्य — राम तुलसी-प्रिय हैं। लाल पुष्प भी प्रिय।