Divyam

महालक्ष्मी अष्टकम्

By देवराज इन्द्र (पद्म पुराण)प्राचीन (पद्म पुराण से उद्धृत)संस्कृत

5 min readLast reviewed May 2, 2026

मूल पाठ

नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।
शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥१॥

नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयंकरि।
सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥२॥

सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयंकरि।
सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥३॥

सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि।
मन्त्रमूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥४॥

आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि।
योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥५॥

स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्तिमहोदरे।
महापापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥६॥

पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणि।
परमेशि जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥७॥

श्वेताम्बरधरे देवि नानालङ्कारभूषिते।
जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥८॥

फलश्रुति

महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रं यः पठेद्भक्तिमान्नरः।
सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा॥९॥

एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम्।
द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्यसमन्वितम्॥१०॥

त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम्।
महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा॥११॥

अर्थ

छंद १ — हे महामाये, श्री-पीठ पर विराजमान, देवताओं द्वारा पूजित, शंख-चक्र-गदा धारण करने वाली महालक्ष्मी — आपको नमस्कार हो।

छंद २ — हे गरुड़ पर आरूढ़ (विष्णु-स्वरूप), कोल-असुर के लिए भयंकर, सब पापों को हरने वाली देवी महालक्ष्मी — आपको नमस्कार हो।

छंद ३ — हे सर्वज्ञ, सब वर देने वाली, सब दुष्टों के लिए भयंकर, सब दुखों को हरने वाली देवी महालक्ष्मी — आपको नमस्कार हो।

छंद ४ — हे सिद्धि और बुद्धि की दात्री, भुक्ति (भोग) और मुक्ति दोनों देने वाली, सदा मंत्र-स्वरूपा देवी महालक्ष्मी — आपको नमस्कार हो।

छंद ५ — हे आदि-अंत से रहित, आद्यशक्ति परमेश्वरी, योग से उत्पन्न, योग-समभूत महालक्ष्मी — आपको नमस्कार हो।

छंद ६ — हे स्थूल-सूक्ष्म-महारौद्र रूप वाली, महाशक्ति, महोदर (बड़े उदर वाली, सब को धारण करने वाली), महापाप-हारिणी महालक्ष्मी — आपको नमस्कार हो।

छंद ७ — हे पद्मासन पर स्थित, परब्रह्म-स्वरूपिणी, परमेश्वरी, जगन्माता महालक्ष्मी — आपको नमस्कार हो।

छंद ८ — हे श्वेत वस्त्र धारण करने वाली, अनेक अलंकारों से भूषित, जगत् में स्थित जगन्माता महालक्ष्मी — आपको नमस्कार हो।

फलश्रुति (छंद ९-११) — जो भक्त इस अष्टकम् का पाठ करता है, उसे सब सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं, सदा राज्य (समृद्धि) मिलती है। एक बार दैनिक पाठ करने पर महापाप नष्ट होते हैं। दो बार पढ़ने पर धन-धान्य से भरपूर रहता है। तीन बार पढ़ने पर महाशत्रु नष्ट होते हैं — महालक्ष्मी सदा प्रसन्न, वरदात्री, शुभा होती हैं।

इतिहास

महालक्ष्मी अष्टकम् पद्म पुराण से उद्धृत है, जहाँ इसे देवराज इन्द्र द्वारा माँ लक्ष्मी की स्तुति के रूप में बताया गया है। पौराणिक कथा के अनुसार जब असुरों ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था, तब इन्द्र ने माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने हेतु इस अष्टक की रचना की थी।

इसकी विशेषताएँ:

  • संस्कृत में आठ शुद्ध छंद, अनुष्टुप मीटर में
  • प्रत्येक छंद का अंत ‘महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते’ से होता है — यह नाम-स्तोत्र की संरचना है
  • तीन फलश्रुति छंद, जिनमें एक, दो, या तीन बार पाठ के अलग-अलग फल बताए गए हैं

यह स्तोत्र दक्षिण भारत के लक्ष्मी मंदिरों — विशेष रूप से कोल्हापुर महालक्ष्मी मंदिर (महाराष्ट्र) — में दैनिक पाठ्य है। उत्तर भारत में दीपावली पूजन एवं शुक्रवार-व्रत में इसका पाठ अनिवार्य अंग है।

अष्टलक्ष्मी से अंतर — महालक्ष्मी अष्टकम् लक्ष्मी के ‘महा’ (सर्व-समावेशी) रूप का स्तवन है। यह अष्टलक्ष्मी (आठ रूपों) से भिन्न है — यहाँ माँ का एक ही महा-रूप आठ छंदों में स्तुत है।

पाठ विधि

कब करें

  • दीपावली रात्रि — मुख्य लक्ष्मी पूजन के समय
  • शुक्रवार — साप्ताहिक लक्ष्मी पूजन
  • धनतेरस, शरद पूर्णिमा, मार्गशीर्ष पूर्णिमा — विशेष पर्व
  • दैनिक प्रातः साधना में
  • विशेष संकल्प के साथ — जैसे व्यापार आरंभ, गृह-प्रवेश, बीमारी से उद्धार

कैसे करें

  1. स्नान के पश्चात लाल या पीले वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा-स्थल पर माँ लक्ष्मी की प्रतिमा अथवा चित्र; श्री यंत्र की उपस्थिति श्रेष्ठ।
  3. गणेश-पूजन से आरंभ करें (किसी भी पूजा का पहला चरण)।
  4. पंचोपचार पूजन — गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य।
  5. एकाग्र मन से अष्टकम् का पाठ — फलश्रुति सहित।
  6. प्रत्येक छंद के अंत में ‘महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते’ पर ध्यान केंद्रित करें — यही मंत्र है।
  7. पाठ के पश्चात लक्ष्मी आरती (ॐ जय लक्ष्मी माता) अवश्य गाएँ।

फलश्रुति-संगत विधि

  • एक बार पाठ (दैनिक) — महापाप-नाशक
  • दो बार पाठ (प्रातः-संध्या) — धन-धान्य-समृद्धि
  • तीन बार पाठ (प्रातः-मध्याह्न-संध्या) — महाशत्रु-विनाश

विशेष मनोकामना के लिए ४१ दिनों तक तीन-काल पाठ का संकल्प श्रेष्ठ माना गया है।

महत्व

  • पौराणिक प्रामाणिकता — पद्म पुराण से उद्धृत; इसकी रचना इन्द्र द्वारा होने का स्पष्ट संदर्भ।
  • सघन एवं संक्षिप्त — मात्र आठ छंद; ५ मिनट में पाठ संभव।
  • मंत्रमय — प्रत्येक छंद का अंत स्वयं मंत्र है — ‘महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते’।
  • तीन स्तरीय फल-संरचना — एक, दो, या तीन बार पाठ के स्पष्ट अलग-अलग लाभ।
  • दार्शनिक गहराई — पाँचवें छंद में ‘आद्यन्तरहिते’ (आदि-अंत रहित) अर्थात् कालातीत; सातवें में ‘परब्रह्म-स्वरूपिणि’ अर्थात् माँ को परब्रह्म का स्त्री-रूप कहा गया।

सामान्य प्रश्न

क्या यह अष्टकम् और ‘श्री महालक्ष्मी अष्टकम्’ एक ही हैं?

हाँ, यही पारंपरिक ‘श्री महालक्ष्मी अष्टकम्’ है — पद्म पुराण से उद्धृत। कुछ अन्य अष्टकम् हैं जिनके नाम मिलते-जुलते हैं (जैसे ‘महालक्ष्मी कवच’), परंतु यह सबसे प्रसिद्ध है।

इसमें कुल कितने छंद हैं?

मूल अष्टकम् आठ छंद का है, और साथ में तीन फलश्रुति छंद हैं — कुल ११ छंद। पाठ करते समय सभी ११ छंद पढ़ने चाहिए।

क्या इसका पाठ संगीत में किया जाता है?

हाँ। एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी का प्रसिद्ध संस्करण राग यमन कल्याण में है। साधारण पाठ के लिए सरल लय में पढ़ें — संगीत आवश्यक नहीं।

क्या स्त्रियाँ रजस्वला अवस्था में पाठ कर सकती हैं?

मानसिक पाठ सदैव अनुमत है। शास्त्रीय परंपरा में स्पर्श-पूजा एवं सस्वर पाठ का परिहार बताया गया है, परंतु मानसिक स्मरण से कोई दोष नहीं।

फलश्रुति में ‘राज्य’ का क्या अर्थ है?

संस्कृत में ‘राज्य’ का सीधा अर्थ है ‘राज-शासन’, परंतु आधुनिक संदर्भ में इसे ‘समृद्धि, अधिकार, स्थिर सम्पत्ति’ के रूप में समझा जा सकता है। आज के युग में यह व्यापार में सफलता, करियर में स्थायित्व, और गृह-स्थिति की दृढ़ता का संकेत है।

क्या यह केवल लक्ष्मी पूजन में पढ़ा जाता है?

मुख्यतः हाँ। परंतु इसका पाठ किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में, यात्रा से पूर्व, और परीक्षा-साक्षात्कार आदि कठिन अवसरों पर भी किया जाता है — माँ की कृपा सर्व-कल्याणकारी है।

कोल्हापुर महालक्ष्मी से संबंध?

महाराष्ट्र का कोल्हापुर महालक्ष्मी मंदिर माँ लक्ष्मी के 51 शक्तिपीठों में से एक है, और देश के सबसे प्रसिद्ध लक्ष्मी मंदिरों में अग्रणी। वहाँ इस अष्टकम् का दैनिक पाठ होता है। आप वहाँ जाएँ या न जाएँ — घर पर भी इसी पवित्र स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।